बुजुर्गों ने किन परिस्थितियों में किया था डेवलप
बड़ा गणपति स्थित मिश्रीलाल गंगवाल कला निकेतन केन्द्र होस्टल को लेकर ममता जैन द्वारा कलेक्टर को ट्रस्टियों के इस्तीफे को लेकर शिकायतें की है, साथ ही आर्थिक लेन-देन की जांच की भी गुहार की गई है। इस मुद्दे के पहले से गोम्मटगिरि का मुद्दा ट्रस्टियों के इस्तीफे से उठकर शुरू हुआ था। यहां भी करीब दो दर्जन ट्रस्टियों के इस्तीफे का मुद्दा सामने आया था।
संत ने 100 ट्रस्टी बनाने का प्रस्ताव देकर गोम्मटगिरि संस्था को मजबूत करने की बात कही थी, जिसे जैन समाजजन पुराने ट्रस्टियों के इस्तीफे और नए 100 ट्रस्टियों के प्रस्ताव को ठीक नहीं मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर दो दिनों से गोम्मटगिरि का मामला भी रंगा पड़ा है। जैन समाजजनों को गोम्मटगिरि के पुराने ट्रस्टियों के इस्तीफे के बाद 100 नए ट्रस्टी बनाने के प्रावधान पर आपत्तियां है।
गोम्मटगिरि की प्राचीन जगह पर नए ट्रस्टी आते हैं तो वे तोड़फोड़ भी करेंगे क्योंकि 1 करोड़ में ट्रस्टी बनाने का प्रावधान संत के समक्ष रखा गया था। जैन समाजजन यह भी लिख रहे हैं कि पुराने बुजुर्गों ने कांग्रेस सरकार के समय किन परिस्थितियों में कैसे यह जगह पहाड़ी पर अलॉट कराई थी और उस समय पहाड़ी पर कैसे काम किया था, यह पुराने लोग के परिजन ही जानते हैं।
कुछ जैन समाजजन लिख रहे हैं कि हम प्रशासन में शिकायत लगाएंगे, तो कुछ ने लिखा कि हम न्यायालय जाएंगे, इस्तीफा और नए ट्रस्टी बनाने का प्रावधान ठीक नहीं है, अगर धनराशि की दिक्कत आ रही है तो समाज सक्षम है, समाज के लोग पैसा दे सकते हैं और संभल नहीं रहा है तो समाज में कई मजबूत लोग है।
कुछ ने यह भी लिखा कि कुछ लोगों के इशारे पर काम किया जा रहा है, जो गलत है। कुछ ने लिखा कि अगर इस्तीफा देना है तो साधारण सभा बुलाकर इस्तीफा दिया जाए, संत के पास इस्तीफा पहुंचाना ठीक नहीं है। अभी तो इस मामले में कुछ लोगों ने बैठकर शिकायत का प्रारूप भी बनाया है, तो कुछ लोगों ने अधिवक्ताओं से बात भी की है कि मामले को कैसे न्यायालय में ले जाया जा सके, जो भी हो कहीं न कहीं नाराजगी की चिंगारी दिगम्बर जैन समाज में गोम्मटगिरि मुद्दे पर उठ रही है।
बड़ा गणपति स्थित मिश्रीलाल गंगवाल कला निकेतन केन्द्र होस्टल की भी स्थिति पर सिटी ब्लास्ट ने समाचार ममता जैन की शिकायत का प्रकाशित किया था उसी के बाद आम लोगों में यह मामला पहुंचा था।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 22 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 2 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें




