मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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संपादकीय नेपाल-तिब्बत की विनाशकारी बाढ़ से सबक: हिमनद झीलों के खतरे को नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी ने

तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हिमनद टूटने और ग्लेशियल झीलों के बढ़ते खतरे के बीच भारत के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम जैसे हिमालयी राज्यों के लिए भी…

तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हिमनद टूटने और ग्लेशियल झीलों के बढ़ते खतरे के बीच भारत के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम जैसे हिमालयी राज्यों के लिए भी यह बड़ी चेतावनी है। नेपाल और तिब्बत के सीमांत इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ के कारणों का विश्लेषण और नतीजों का आकलन अभी जारी रहेगा, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर इस जरूरत को रेखांकित किया है कि आशंकाओं की अनदेखी या उसके प्रति उदासीनता का परिणाम क्या हो सकता है। नेपाल का जो समूचा इलाका हिमनद टूटने की वजह से तबाह हो गया, जानमाल की व्यापक क्षति हुई, उसका आम लोग भले ही ठीक-ठीक अनुमान नहीं लगा सके होंगे, लेकिन सरकार की नजर स्थानीय उथल-पुथल के संकेतों पर रहनी चाहिए थी। साथ ही अन्य देशों में ऐसी स्थितियों के असर की आशंका हो, तो वहां की एजंसियों के साथ तालमेल से कुछ एहतियाती कदम उठाए जा सकते थे। खासतौर पर तब, जब नेपाल- तिब्बत के इस इलाके में बर्फ और चट्टानों वाला हिमस्खलन होने और उसकी वजह से बाढ़ आने की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। ऐसे में सावधानी बरतना एक नियमित तकाजा था। हालांकि यह सही है कि प्राकृतिक आपदाओं को रोकना संभव नहीं है, लेकिन अगर अचानक उपजने वाले खतरों को ध्यान में रख कर बचाव के पूर्व-इंतजाम किए जाएं, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जाहिर है, अब नेपाल को अगले कुछ समय तक के लिए तबाह हो गए इलाकों में बचे-खुचे को संभालने, लापता लोगों की खोज, पुनर्वास और पुनर्निर्माण को लेकर कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। बेशक वह अपने स्तर पर यह सब करने की कोशिश करेगा, लेकिन ऐसे समय में दूसरे देशों की सहायता भी काफी मायने रखती है। प्रभावित सभी इलाकों में हुए नुकसान का आकलन सामने आने के बाद पूरी तस्वीर साफ होगी, लेकिन फिलहाल नेपाल के वित्त मंत्री का कहना है कि इस प्रलयंकारी बाढ़ से हुई क्षति की भरपाई के लिए देश को चार-पांच अरब डालर की जरूरत होगी। यह समझा जा सकता है कि अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर पहले ही कई तरह के दबाव झेल रहे नेपाल के सामने अब इस त्रासदी की वजह से जो मुश्किल पैदा होगी, उससे निपटना उसके लिए एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा, इस बात का अध्ययन करने की जरूरत है कि व्यापक तबाही वाली इस बाढ़ की प्रकृति, रफ्तार और नुकसान पहुंचाने का दायरा इतना अलग क्यों था और इसकी वजहें क्या होंगी। दरअसल, इस आपदा का जो स्वरूप सामने आया, उसे समझना न केवल नेपाल, बल्कि उससे सटे देशों के लिए भी इसलिए जरूरी है कि अगर इसका दायरा और बड़ा हुआ तो इसकी जद में खासतौर पर भारत के भी कई इलाके आएंगे।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 31 अगस्त 2026 के अंक में पृष्ठ 9 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें