भाजपा नेता सांसद प्रतिनिधि डॉ. संतोष वाधवानी ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर जनता के हितों की रक्षा करना भी है। लेकिन जब संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाए जाते हैं, तब राजनीतिक आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों की रणनीति पर बहस हो सकती है। यदि निर्वाचन आयोग के कामकाज पर गंभीर आपत्तियाँ हैं, तो उन्हें प्रमाणों के साथ संसद और उचित संवैधानिक मंचों पर उठाया जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन आधारों पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसके लिए सिद्ध कदाचार या अक्षमता जैसे आधार आवश्यक हैं। संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। केवल राजनीतिक विरोध, नारेबाजी या किसी दल की इच्छा से मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 23 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 2 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें






