शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
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नकली रजिस्ट्री और दस्तावेज बनाने वाले माफियाओं को संरक्षण- कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने खुलासा किया कि शासन की आड़ में कई प्रभावी माफियाओं को संरक्षण मिला हुआ है, वे नकली रजिस्ट्री और दस्तावेज बनाने का काम कर…

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने खुलासा किया कि शासन की आड़ में कई प्रभावी माफियाओं को संरक्षण मिला हुआ है, वे नकली रजिस्ट्री और दस्तावेज बनाने का काम कर रहे हैं। द्विवेदी ने प्रमाण के साथ जूनी इंदौर क्षेत्र के अधिकारी पर अंगुली उठाई और कहा कि सुभाष पिता जीतराम निवासी सांईकृपा कालोनी इंदौर ने दीपिका निष्ठा पिता जगदीश वर्मा से लिंबोदी तहसील जूनी इंदौर जिला इंदौर की खसरा नंबर 66/331/1/1/10, 66/331/1/1/15, 66/1/1/16 कुल सवें नग 3संयुक्त रकबा 0.150 की रजिस्ट्री करवाई, पश्चात नामांतरण आवेदन लगाया। नामांतरण आवेदन पर चार महीने बाद आदेश नायब तहसीलदार व्दारा 12/8/2026को दिया गया। इस आदेश के बाद तथाकथित रजिस्ट्री 1अ//719दिनांक 10/6/1998 की आशीष कुमार पिता शिवकुमार सक्सेना निवासी भोपाल ने एसडीएम धनश्याम धनगर के समझ आवेदन साथ पेश की और आवेदन में बताया कि उसके पिताजी के नाम रजिस्ट्री थी, माता-पिता की मृत्यु हो गई है और मुझे अभी मिली अतः नामांतरण आदेश पर स्थगन दिया जाए। धनश्याम धनगर ने रजिस्ट्री की सत्यापित प्रतिलिपि लिए बिना, दस्तावेज परीक्षण किए बिना तथा पक्षकारों को सूचना दिए बिना इस नकली रजिस्ट्री पर दिनांक 14अगस्त को स्थगन आदेश दिया कि जो नायब तहसीलदार ने 12/8/2026 का आदेश दिया है उस पर स्थगन दिया जाता है।

अजब-गजब स्थिति तो यह कि उपपंजीयक कार्यालय इंदौर से जब इस नंबर की रजिस्ट्री की सत्यापित प्रतिलिपि निकाली जाती है तो वहां अन्य दस्तावेज भाड़ा चिट्ठी मिलती है। अधिकारी धनश्याम धनगर इस सत्यापित प्रतिलिपि को भी नहीं मानते और एक पत्र वरिष्ठ जिला पंजीयक मंजूलता पटेल को लिखकर इस नंबर के दस्तावेज की सत्यता बताने का लिखते हैं। वरिष्ठ जिला पंजीयक कार्यालय से विधिवत जानकारी दी जाती है। 24/9/2026 को की गई वांछित जानकारी दी जाती है कि इस नंबर की रजिस्ट्री नहीं है, रिकॉर्ड में अपितु भाड़ा चिट्ठी है। धनश्याम धनगर इसके वावजूद एक पत्र जिला पंजीयक डॉ. अमरेश नायडू को लिखते हैं कि आपके कार्यालय से विधिवत जानकारी भेजें। धनश्याम धनगर को जानकारी नहीं कि उपपंजीयक कार्यालय मोती तबेला मुख्यालय है। मैनुअल रजिस्ट्री 2015 तक का रिकॉर्ड यही है। सन् 2012 बाद उपपंजीयक कार्यालय 2,3,4 बने है और जो नकल या जानकारी मांगी गई वो मुख्यालय उपपंजीयक कार्यालय मोती तबेला में रहती है। इस तरह एक नकली रजिस्ट्री आधार पर बिना परीक्षण किए, बिना बैधानिक बारसान जाने बिना पक्षकारों को सूचना दिए एक तरफा स्थगन आदेश देते हैं और मामले को पेचीदा बनाने खातिर लेटर लेटर खेल रहे हैं। व्दिवेदी ने सवाल उठाया कि सबसे अधिक नकली रजिस्ट्री के मामले धनश्याम धनगर के न्यायालय में ही क्यों चल रहे हैं, संदिग्ध दस्तावेज आधारों पर स्थगन आदेश दिया जाता है, अपराधियों को संरक्षण प्रदान किया जाता है। व्दिवेदी ने सवाल उठाया कि नकली दस्तावेज है साबित हो चुका तो क्या जिला पंजीयक कार्यालय गलत जानकारी देगा।

कुल मिलाकर खजराना की एक जमीन पर उपायुक्त कार्यालय के नकली आदेश आधार पर कब्जा दिलाने की तैयारी करने वाले एसडीएम भी यही थे, पोल खुली तो फिर पलटी मारी उसके वावजूद सबक नहीं सीखा और फिर एक कारनामा अंजाम दिया है। व्दिवेदी ने सवाल उठाया कि जिस जिले के प्रभारी मंत्री मुख्यमंत्री स्वयं हो उस जिले में लगातार नकली रजिस्ट्री मामले सामने आते हो तो क्या कहा जाए और कलेक्टर शिवम् वर्मा का खास अनुराग इस अधिकारी पर हो तो। उक्त पूर्ण जानकारी प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद द्विवेदी द्वारा दी गई।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 23 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 3 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें

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सिटी ब्लास्ट, 23 अक्टूबर 2026, पृष्ठ 3