मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
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सिंहस्थ 2028 की लाइफ लाइन एमआर-12 की धीमी रफ्तार पर उठ रहे सवाल

समय पर पूरा होगा काम या श्रद्धालुओं को झेलना पड़ेगा जाम

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच इंदौर की बहुचर्चित निर्माणाधीन एम आर – 12 सड़क सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सिंहस्थ की लाइफ लाइन मानी जा रही है। जिसके समय पर पूरे होने को लेकर लोगों को चिंता हो रही है। जिसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इस सड़क का मुख्य उद्देश्य इंदौर बायपास को सीधे उज्जैन रोड से जोड़ना है, जिसका सबसे बड़ा फायदा सिंहस्थ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की इंदौर उज्जैन के बीच की आवाजाही आसान हो सके। हालांकि बड़ी बात यह है कि परियोजना में अब पहले से प्रगति जरूर हुई है, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण कार्य अधूरे है। सवाल उठ रहे है कि क्या यह सड़क सिंहस्थ से पहले तय समय सीमा में पूरी हो पाएगी। जिसका लाभ लाखों श्रद्धालुओं को मिलने का दावा किया जा रहा है। फिलहाल काम की रफ्तार को देखकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे है।

लंबे समय से चल रहा बाधक निर्माणों का सर्वे

गौरतलब है कि एमआर-12 सड़क निर्माण में सबसे बड़ी बाधा सड़क चौड़ीकरण में बाधक परिवारों का सर्वे प्रस्तावित है। जो कि लंबे समय से चल रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि पात्र परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। जिसको लेकर सर्वे का काम जारी है। वहीं लोगों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि सर्वे कब पूरा होगा और पुनर्वास की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होगी,और कब शुरू होगी। एमआर-12 का सबसे कठिन हिस्सा रेलवे ओवरब्रिज है। डिजाइन में बदलाव के बाद अब निर्माण की गति पर सबकी नजर है। यदि आरओबी का हिस्सा समय पर पूरा नहीं हुआ, तो पूरी परियोजना की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा दूसरी बड़ी बाधा कान्ह नदी पर बनने वाला पुल है। इसको लेकर भी संशय है। क्या यह पुल तय समय पर तैयार हो पाएगा। जिसको लेकर भी लोगों को आशंका है। हालांकि इंदौर विकास प्राधिकरण के अफसर दावा कर रहे है कि पुल का काम तय समय सीमा में पूरा हो जाएगा। यही नहीं बड़ी बात यह है कि कान्ह नदी पर पुल निर्माण शुरू भी हो चुका है। यह एमआर -12 का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुल और आरओबी दोनों समय पर पूरे होंगे तभी परियोजना का वास्तविक लाभ सिंहस्थ में लाखों श्रद्धालुओं को मिलेगा।

एमआर-12 बनने से बदलेगा इंदौर का ट्रैफिक

विशेषज्ञों का मानना है कि एमआर-12 बनने से बायपास और उज्जैन रोड के बीच सीधा संपर्क मिलेगा, जिससे शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। ख़ासकर एमआर 10 रोड़ ओर बाणगंगा से अरविंदो मुख्य सड़क का ट्रैफिक का दबाव 50 फीसदी तक कम होने का दावा किया जा रहा है। वहीं खास बात यह है कि सिंहस्थ की तैयारियों में अब समय बेहद कम बचा है। ऐसे में रेलवे, आईडीए और पीडब्ल्यूडी सहित सभी एजेंसियों को तय सीमा में तेजी से निर्माण कार्य पूरा करवाने का दबाव है। क्योंकि सिंहस्थ में लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में सड़क, पुल, रेलवे ओवरब्रिज और अन्य सुविधाओं का समय पर पूरा होना भीड़ के लिहाज से बेहद जरूरी है।

एमआर-12 के आसपास बसे परिवारों में चिंता

एमआर-12 के आसपास बसे करीब 800 से ज्यादा परिवारों में भी बड़ी चिंता है। कई लोग सर्वे और पुनर्वास की लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि लंबे समय से सर्वे की प्रक्रिया चल रही है। यदि हटना पड़े तो पहले सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था हो। जब तक सही जगह सभी का विस्थापन नहीं होता तब तक हटने का सवाल ही नहीं।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 16 जुलाई 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें