सर्व जैन समाज के बैनरतले कल रीगल तिराहा पर जैन मंदिरों में चोरी व बेअदबी को लेकर नाराजगी जाहिर की गई थी और पुलिस को ज्ञापन भी दिया गया था। इसके बाद से जैन समाज के सोशल मीडिया ग्रुप पर ही कुछ लोगों ने लिखा कि जैन समाज के कर्ताधर्ताओं ने रीगल तिराहा पर प्रदर्शन की अनुमति पुलिस से नहीं ली थी जो गलत है, क्योंकि पुलिस इस मामले में संज्ञान ले रही है। सूत्रों का भी यही कहना है कि ज्ञापन तक की जानकारी पुलिस को नहीं दी गई थी, जबकि अभी पुलिस कमिश्नर की ओर से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी है। कुछ जैन समाजजनों ने लिखा कि गनीमत है कि पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई वहां पहुंचने वाले जैन समाजजनों पर नहीं की, कुछ ने यह भी कहा कि जैन समाजजन धनाढ्य है, लाखों-करोड़ों की बोली भी लगाते हैं, रथ पर सवारी भी निकालते हैं, बड़े-बड़े पंडाल बनाकर आयोजन करते हैं, जिनमें बड़े भोजन के आयोजन भी होते हैं, हर कार्य में बड़ी धनराशि खर्च होती है। कुछ ने लिखा कि लेकिन धनाढ्य जैन समाजजन मंदिरों में अपने देव-शास्त्र और भगवान के प्रति खर्च करने में रुचि नहीं रखते है। वहां कैमरे लगवाने से लेकर डीवीआर और सुरक्षा गार्ड रखने के खर्च में भी कंजूसी दिखाते हैं इसीलिए मंदिरों में मूर्ति की चोरी और बेअदबी के प्रयास चोरों द्वारा होते हैं। कुछ ने लिखा कि जहां धनाढ्य पूंजीपति जिन मंदिरों में नियमित पूजन करते हैं वहां भी कैमरे लगवाने और गार्ड रखवाने में पीछे रहते हैं। कुल मिलाकर प्रदर्शन और ज्ञापन जैन समाज में ही सुर्खियों में बन गया।
यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 18 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 4 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें






