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जमीन मालिकों का हक बना बिल्डरों के लिए कारोबार का मौका, टीडीआर की रफ्तार पर सवाल

सर्टिफिकेट बेचकर मिल सकता है पैसा, लेकिन जारी होने में देरी से प्रभावितों के विकल्प सीमित

शहर में सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन देने वाले लोगों को नगर निगम ने नकद मुआवजे के बजाय ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) का विकल्प दिया। इस व्यवस्था का उद्देश्य जमीन मालिकों को उनके छोड़े गए हिस्से के बदले निर्माण का अतिरिक्त अधिकार देना है। जरूरत पड़ने पर इस अधिकार को बेचकर आर्थिक लाभ भी लिया जा सकता है। लेकिन टीडीआर सर्टिफिकेट जारी होने की धीमी प्रक्रिया ने इस व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर बिल्डर अतिरिक्त निर्माण की अनुमति हासिल करने के लिए टीडीआर का इस्तेमाल कर सकते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीन देने वाले मालिकों को अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए सर्टिफिकेट का इंतजार करना पड़ रहा है।

जमीन के बदले नकद नहीं, निर्माण का अधिकार

टीडीआर व्यवस्था में सड़क चौड़ीकरण के लिए छोड़ी गई जमीन के बदले नियमानुसार अतिरिक्त निर्माण की अनुमति दी जाती है। इसका उपयोग भवन में अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) के रूप में किया जा सकता है। जमीन मालिक स्वयं इसका इस्तेमाल कर सकते हैं या नियमानुसार किसी अन्य व्यक्ति अथवा बिल्डर को बेच सकते हैं। इस तरह यह अधिकार जमीन मालिक के लिए आर्थिक संपत्ति बन सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि सर्टिफिकेट कब जारी होता है, बाजार में उसकी मांग कितनी है और उसका उपयोग किन नियमों के तहत किया जा सकता है।

बिल्डरों के लिए भी उपयोगी है टीडीआर

शहर में जहां अतिरिक्त निर्माण की संभावना है, वहां बिल्डरों के लिए टीडीआर उपयोगी हो सकता है। इससे नियमानुसार अनुमत निर्माण क्षेत्र बढ़ाने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि टीडीआर केवल सड़क चौड़ीकरण का मुआवजा नहीं, बल्कि निर्माण क्षेत्र से जुड़ी एक आर्थिक व्यवस्था भी है। अब तक जारी सर्टिफिकेट में से 20 प्रभावितों द्वारा बिल्डरों को बेचे जाने की जानकारी भी सामने आई है।

प्रक्रिया की देरी से घट सकता है लाभ

नगर निगम के पहले चरण की चार सड़कों पर टीडीआर सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ी है। वहीं, मास्टर प्लान की चार अन्य सड़कों के लिए प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। इसके कारण प्रभावितों को सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में वे न तो अपने अधिकार का उपयोग कर पा रहे हैं और न ही जरूरत पड़ने पर उसे बेचकर आर्थिक लाभ ले सकते हैं।

टीडीआर प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति

शहर की सड़कें चौड़ी करने के लिए किसी ने मकान का हिस्सा छोड़ा तो किसी की दुकान और जमीन सड़क में चली गई। उम्मीद थी कि जमीन के बदले मिलने वाला ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) सर्टिफिकेट जल्द मिल जाएगा, लेकिन राहत की यह व्यवस्था प्रभावितों के लिए इंतजार का सबब बन गई है। नगर निगम ने पहले चरण की चार सड़कों के लिए 1211 लोगों की जमीन ली, लेकिन अब तक सिर्फ 80 लोगों को ही टीडीआर सर्टिफिकेट मिल पाए हैं। यानी 1131 प्रभावित अब भी अपने हक के दस्तावेज मिलने का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर, जिन लोगों को सर्टिफिकेट मिल चुके हैं, उनमें से 20 इसे बिल्डरों को बेच चुके हैं। वहीं, मास्टर प्लान की चार अन्य सड़कों के 38 प्रभावितों को प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद राहत नहीं मिल सकी है।

यह खबर सिटी ब्लास्ट ई-पेपर के 22 अक्टूबर 2026 के अंक में पृष्ठ 8 पर प्रकाशित हुई है। पूरा ई-पेपर पढ़ें

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सिटी ब्लास्ट, 22 अक्टूबर 2026, पृष्ठ 8